Systems thinking — तंत्र चिंतन
तंत्र चिंतन — जटिल समस्याओं के विश्लेषण और समाधान के लिए एक समग्र दृष्टिकोण, जो किसी वस्तु को एक तंत्र के रूप में प्रस्तुत करने पर आधारित है — अर्थात् परस्पर संबद्ध तत्वों का एक व्यवस्थित समुच्चय, जो एक-दूसरे के साथ और अपने परिवेश के साथ एकीकृत समग्र संदर्भ में अंतःक्रिया करते हैं।
परिभाषा
तंत्र चिंतन वह क्षमता है जिसके द्वारा अलग-अलग भागों को नहीं, बल्कि उनकी परस्पर संबद्धताओं और एक समग्र संरचना के भीतर की गतिशीलता को प्रतिरूपित (model) एवं समझा जाता है, उभरते (emergent) गुणों को ध्यान में रखा जाता है और परिवर्तनों के परिणामों का पूर्वानुमान लगाया जाता है।
सैद्धांतिक आधार
- सामान्य तंत्र सिद्धांत (L. von Bertalanffy) — एक अधि-सिद्धांत (metatheory), जो तंत्रों के कार्य-संचालन के सार्वभौमिक नियमों और उनकी पदानुक्रमिकता को उजागर करता है।[1]
- साइबरनेटिक्स (N. Wiener) — प्रतिपुष्टि (feedback) और तंत्रों के स्व-नियमन का विज्ञान, जो होमियोस्टैसिस की अवधारणा प्रस्तुत करता है।
- आवश्यक विविधता का सिद्धांत (W. Ashby) — एक तंत्र बाह्य प्रभावों को तभी नियंत्रित कर सकता है जब उसकी आंतरिक अवस्थाओं की विविधता उससे कम न हो।
- तंत्र गतिशीलता (J. Forrester) — विलंब और प्रतिपुष्टि को ध्यान में रखते हुए भंडारों और प्रवाहों का प्रतिरूपण।
- «सॉफ्ट» तंत्र पद्धति (P. Checkland) — प्रतिभागियों की संलग्नता और समस्या-स्थिति के प्रतिरूपण के माध्यम से सामाजिक और संगठनात्मक समस्याओं के विश्लेषण का दृष्टिकोण।
- तार्किक-पद्धतिशास्त्रीय पहलू (V. N. Sadovsky) — तंत्र के लक्षणों का औपचारिकीकरण: संबंध, तत्वों की अविभाज्यता, बाह्य परिवेश के साथ अंतःक्रिया और समय के साथ संरचना का संरक्षण।
मुख्य सिद्धांत
- समग्रता — तंत्र अपने भागों के योग से अधिक होता है; उभरते (emergent) गुण भागों से व्युत्पन्न नहीं होते।
- पदानुक्रमिकता — प्रत्येक तंत्र उपतंत्रों से बना होता है और किसी अधि-तंत्र का अंग होता है।
- प्रतिपुष्टि — वे पाश जिनके माध्यम से तंत्र का आउटपुट उसके इनपुट को प्रभावित करता है।
- गतिशीलता और विलंब — समय-अंतरालों और प्रभावों के संचय का ध्यान।
- अनुकूलनशीलता और होमियोस्टैसिस — स्व-नियमन और संतुलन-पुनर्स्थापन की क्षमता।
- उद्भव (Emergence) — तंत्र में नए गुणों का प्रकट होना जो अलग-अलग तत्वों में नहीं पाए जाते।
इतिहास
- 1940–1960: L. von Bertalanffy (सामान्य तंत्र सिद्धांत), N. Wiener (साइबरनेटिक्स), W. Ashby (विविधता का सिद्धांत) के कार्य।
- 1961: J. Forrester ने औद्योगिक और आर्थिक प्रक्रियाओं के लिए तंत्र गतिशीलता की नींव रखी।
- 1970–1972: V. N. Sadovsky ने «तंत्र» के लक्षणों को औपचारिक रूप दिया और तंत्र दृष्टिकोण के पद्धतिशास्त्रीय विरोधाभासों का अध्ययन किया।
- 1980–1990 का दशक: «सॉफ्ट» तंत्र पद्धति (Checkland) का विकास, प्रबंधन और IT में व्यापक अनुप्रयोग।
तंत्र-विचार-क्रिया दृष्टिकोण (MMK)
सोवियत संघ में तंत्र चिंतन का विकास G. P. Shchedrovitsky के नेतृत्व में मॉस्को पद्धतिशास्त्रीय मंडल (MMK) से जुड़ा है। उन्होंने तंत्र-विचार-क्रिया पद्धति (SMD) प्रस्तावित की, जिसमें चिंतन और क्रिया को अविभाज्य तांत्रिक प्रक्रियाओं के रूप में देखा जाता है। मुख्य विचार:
- तंत्र पद्धति के एकीकृत सिद्धांत के रूप में, जो चिंतन और क्रिया के सभी रूपों को समाहित करता है।
- क्रिया एक स्वतंत्र तंत्र के रूप में — तंत्रों का विश्लेषण परियोजनाओं और अभ्यासों (OD-खेल) के माध्यम से सामूहिक चिंतन के विकास हेतु किया जाता है।
- प्रतिवर्तन और अभिकल्पन — तंत्र चिंतन में अपने विचारों का सचेत प्रबंधन और चिंतन प्रौद्योगिकी के माध्यम से नए ज्ञान का सृजन सम्मिलित है।
MMK के प्रमुख सहभागियों का योगदान
- G. P. Shchedrovitsky — तंत्र को परतों (प्रक्रियाएँ, संरचना, संगठन, आकारिकी) में विभाजन की अवधारणा और तंत्र चिंतन के अभ्यास के लिए OD-खेल की पद्धति विकसित की।[2][3]
- E. G. Yudin — तांत्रिकता के दार्शनिक आधारों को सूत्रबद्ध किया, क्रिया को सार्वभौम व्याख्यात्मक श्रेणी और तंत्र विश्लेषण के मानदंड के रूप में स्थापित किया।
- V. A. Lefebvre — प्रतिवर्ती खेलों के तर्क द्वारा विचार-विषयों के प्रतिवर्तन और प्रतिरूपण की अवधारणा प्रस्तुत की।
- I. V. Blauberg — Yudin और Sadovsky के साथ संयुक्त कार्यों में तंत्र दृष्टिकोण के सामान्य सैद्धांतिक सिद्धांतों का औचित्य सिद्ध किया।
साहित्य
- Bertalanffy L. von. सामान्य तंत्र सिद्धांत। — M.: Progress, 1979.
- Sadovsky V.N. सामान्य तंत्र सिद्धांत के आधार। — M.: Nauka, 1974.
- Blauberg I.V., Yudin E.G. तंत्र दृष्टिकोण का उद्भव और सार। — M.: Nauka, 1973.
- Wiener N. साइबरनेटिक्स: या जीव और मशीन में नियंत्रण और संचार। — M.: Mir, 1965.
- Forrester J. परिवर्तन का तर्क। — M.: Nauka, 1969.
- Sadovsky V. N. सामान्य तंत्र सिद्धांतों का तार्किक-पद्धतिशास्त्रीय विश्लेषण। — M.: Nauka, 1972.
- Checkland P. «सॉफ्ट» तंत्र की पद्धति। — L.: Polytechnika, 1981.
- Volkova V. N., Voronkov V. A., Denisov A. A. प्रबंधन और संचार में तंत्र सिद्धांत और तंत्र विश्लेषण की विधियाँ। — M.: Radio i svyaz, 1983.
- Peregudov F.I., Tarasenko F.P. तंत्र विश्लेषण का परिचय। — M.: Vysshaya shkola, 1989.
- Shchedrovitsky G. P. तंत्र अनुसंधान की पद्धति की समस्याएँ। — M.: Nauka, 1969.
- Yudin E. G. तांत्रिकता और क्रिया। — M.: Progress, 1974.
टिप्पणियाँ
- ↑ «Системное мышление играет ведущую роль в широком диапазоне человеческой деятельности — от индустриального предприятия и средств вооружения до эзотерических тем чистой науки.» — Л. фон Берталанфи,
- ↑ «Системный подход оказывается формой методологического мышления, направленного на организацию коллективных форм действия.» — Г. П. Щедровицкий, Ежегодник 1975, С. 184. (Системный подход как форма мышления для организации действия)
- ↑ «Мы должны конструировать систему не как объект природы, а как систему деятельности — искусственную, создаваемую по плану и проекту.» — Г. П. Щедровицкий, Ежегодник 1975, С. 183.
अन्य लेखों से संबंध
- तंत्र दृष्टिकोण
- तंत्र विश्लेषण
- तंत्र की संरचना
- तंत्र गतिशीलता
- उद्भव (Emergence)
- तंत्र समग्रवाद (Системный холизм)